पूजा के लिए सही बेल पत्र चुनने के नियम:
1. अतिरिक्त धारियों और चिह्नों से मुक्त हों:
ऐसे बेल पत्र जिन पर अतिरिक्त धारियां, चक्र या वज्र (गर्जन के निशान) हों, उन्हें पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ये खंडित माने जाते हैं।
2. संपूर्ण और अखंड पत्ते चुनें:
बेल पत्र कहीं से कटे या फटे हुए नहीं होने चाहिए। पूजा में संपूर्ण, अखंड और सही आकार के पत्ते अर्पित करना श्रेष्ठ माना जाता है।
3. संख्या का ध्यान रखें:
परंपरागत रूप से कई बेल पत्र अर्पित किए जाते हैं, लेकिन यदि अधिक पत्ते उपलब्ध न हों, तो एक साबुत बेल पत्र भी श्रद्धा के साथ अर्पित किया जा सकता है।
4. ताजगी महत्वपूर्ण है:
हमेशा ताजे और स्वच्छ बेल पत्रों का उपयोग करें। सूखे या मुरझाए हुए पत्तों को पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है।
5. संग्रह का सही समय:
बेल पत्र को एक दिन पहले, विशेष रूप से सुबह के समय तोड़ना सबसे अच्छा माना जाता है। उन्हें साफ पानी से धोकर पूजा के लिए तैयार करें।
6. विशेष दिनों पर तोड़ने से बचें:
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या और मंगलवार को बेल पत्र तोड़ना वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिलता।
इन नियमों का पालन करके भक्त अपनी पूजा को शुद्ध और फलदायी बना सकते हैं, विशेष रूप से सावन सोमवार जैसे पवित्र अवसरों पर, जो भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
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